उपराष्ट्रपति चुनाव 2007 : तथ्य एक दृष्टि में

उपराष्ट्रपति चुनाव 2007 : तथ्य एक दृष्टि में

उपराष्ट्रपति का चुनाव इस महीने की 10 तारीख को होगा। यह तेरहवाँ चुनाव होगा। इससे पहले 1952, 1957 (दोनों बार निर्विरोध), 1962, 1967, 1969, 1974, 1979 (कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं), 1984, 1987, 1992, 1997 और 2002 में चुनाव हो चुका है।

भारत के संविधान के अनुच्छेद 66(1) के प्रावधान के तहत, निर्वाचक मंडल के सदस्य उपराष्ट्रपति का चुनाव करेंगे जिसमें संसद के दोनों सदनों के सदस्य होंगे।

संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों के साथ संसद के दोनों सदनों में मनोनीत सदस्य (लोकसभा में 2 और राज्यसभा में 12) भी मतदान करने के लिए योग्य हैं।

विधान सभाओं के सदस्यों को उपराष्ट्रपति के चुनाव में मतदान करने का अधिकार नहीं होता है।

इलैक्टोरल कॉलेज की वर्तमान संख्या इस प्रकार है-

राज्य सभा :

निर्वाचित- 233

मनोनीत- 12

लोकसभा :

निर्वाचित- 543

मनोनीत- 2

कुल- 790

अनुच्छेद 67 के प्रावधान के तहत उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद से 5 वर्ष की अवधिा तक अपने पद पर रहेगा तथा अनुच्छेद 67 की धारा (2) के प्रावधान के तहत उपराष्ट्रपति, अपनी अवधि खत्म होने के बावजूद, जब तक उसके उत्ताराधिकारी का चुनाव नहीं हो जाता अपने पद पर बना रहेगा।

निम्नलिखित योग्यताएं रखने वाला कोई भी व्यक्ति उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ सकता है-

) वह भारत का नागिरक हो;

[k) 35 वर्ष की उम्र पूरी कर चुका हो; तथा

) मंत्री परिषद (अनुच्छेद 66) के सदस्य के रूप में चुनाव लड़ने के योग्य हो।

यदि कोई व्यक्ति भारत सरकार के तहत या किसी राज्य सरकार या किसी स्थानीय या किसी उल्लेखित सरकार के तहत अन्य निकाय में किसी लाभ के पद पर हो तो वह उपराष्ट्रपति के पद पर चुनाव लड़ने के योग्य नहीं होगा।

यद्यपि किसी व्यक्ति को सिर्फ इसलिए लाभ के पद पर नहीं माना जाएगा कि वह किसी संघ का अधयक्ष या उपाधयक्ष या किसी राज्य का राज्यपाल अथवा संघ या किसी राज्य में मंत्री हो।

चुनाव के संबंध में विस्तृत प्रावधान राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति चुनाव अधिानियम, 1952 (1952 की संख्या 31) तथा राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति चुनाव कानून, 1974 के तहत किए गए हैं।

उपराष्ट्रपति के संभावित उम्मीदवार को प्रस्तावक के रूप में कम से 20 सांसदों और द्वितीयक के रूप में कम से कम 20 सांसदों के जरिए नामांकन पत्र हासिल करने चाहिए।

उपराष्ट्रपति के पद का चुनाव एकल मत हस्तांतरण के माधयम से समानुपाती प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुरूप होगा तथा ऐसे चुनाव में मतदान गुप्त होगा।

संसद के प्रत्येक सदस्य के मत का मूल्य एक है। उपराष्ट्रपति के चुनाव में मतदान करने का ढंग राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति निर्वाचन कानून, 1974 के विनियम 17 के अनुरूप है।

मत पत्र पर कोई चुनाव संकेत नहीं है। मत पर दो कॉलम होंगे। मत पत्र के कॉलम-1 में शीर्षक- ''उम्मीदवार का नाम'' होता है तथा दूसरे कॉलम में शाीर्षक ''अपनी वरीयता पर निशान लगाएं'' होता है। प्रत्येक सांसद के पास उतनी ही वरीयता होती हैं जितने उम्मीदवार होते हैं लेकिन कोई भी मत पत्र सिर्फ इस बिना पर अमान्य घोषित नहीं किया जाएगा कि ऐसी सभी वरीयताओं पर निशान नहीं लगाया गया है।

प्रत्येक उम्मीदवार को मिले कुल मान्य मतों की गिनती करने के बाद, चुनाव अधिकारी चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों के कुल मत गिनेगा। कुल मान्य मतों को 2 से विभाजित करके तथा शेष एक जोड़कर, बाकी की अनदेखी करके, यदि कोई हो तो, उम्मीदवार को निर्वाचित होने की घोषणा की जाएगी। उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि सभी उम्मीदवारों को मिले कुल मान्य मत 789 हैं तो निर्वाचित होने का जरूरी कोटा होगा-

789

-------#1 # 394.50 # (.50 की अनदेखी)

2

कोटा # 394 # 1 # 395

कोटा तय करने के बाद निर्वाचन अधिकारी देखता है कि क्या कोई उम्मीदवार उसे मिले पहली वरीयता के कुल मतों के आधार पर निर्वाचित घोषित होने के लिए सुरक्षित कोटा हासिल कर चुका है।

अगर कोई भी उम्मीदवार पहली वरीयता वाले मतों के आधार पर कोटा हासिल नहीं करता, तो निर्वाचन अधिकारी दूसरे दौर की गिनती करता है जिसमें पहली वरीयता वाले सबसे कम मत हासिल करने वाले उम्मीदवार को छोड़ दिया जाता है और उसके मत इन मत पत्रों पर दी गयी दूसरी वरीयता के अनुसार शेष उम्मीदवारों को दे दिए जाते हैं। अन्य उम्मीदवार उसी एक मूल्य के बराबर, बाहर किए गए उम्मीदवार का मत प्राप्त करते हैं।

निर्वाचन अधिकारी बाद के दौर में तब तक सबसे कम मत प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को बाहर करना जारी रखेगा, जब तक कि कोई उम्मीदवार जरूरी कोटा हासिल नहीं कर लेता और उस अकेले बचे उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा।

जिन सदस्यों के संबंध में सक्षम न्यायालय ने यानी उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय ने उनकी निर्वाचन प्रक्रिया में शामिल होने के बारे में कोई आदेश दिया है, वे चुनाव में मत देने के योग्य नहीं है, यद्यपि उनके नाम निर्वाचक मंडल में शामिल होंगे।

उपराष्ट्रपति के चुनाव के संबंध में कोई विवाद उत्पन्न होने के मामले में-

i) कोई भी उम्मीदवार उपराष्ट्रपति के चुनाव को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका किसी ऐसे चुनाव के बारे मेें दायर कर सकता है या कोई भी 10 या अधिक सांसद मिलकर याचिका दायर कर सकते हैं।

ii) इस प्रकार की चुनाव याचिका पर निर्णय करने का अधिकार भारत के उच्चतम न्यायालय को होगा।

iii) चुनाव याचिका घोषणा प्रकाशित होने के 30 दिनों के भीतर रिटर्नड उम्मीदवार के नाम सहित पेश की जा सकती है।

(अधिक जानकारी के लिए, कृपया ''भारत के उपराष्ट्रपति के पद का चुनाव 2007'' शीर्षक से लिखी सामग्री डाउनलोड करें। जो भारत के निर्वाचन आयोग की वेबसाइट www.eci-gov.in पर दी गयी है।)

 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नाम निर्देशन पत्र प्राप्त करने की आज अंतिम तारीख आज 17 उम्मीदावरों ने नाम निर्देशन पत्र दाखिल किये

14 स्थान कंटेनमेंट जोन से मुक्त

कवल वन्यजीव अभयारण्य में वन भूमि का अतिक्रमण