प्रोफेसर अभय मौर्य अंग्रेजी तथा अन्य विदेशी भाषा विश्वविद्यालय के पहले कुलपति बने

प्रोफेसर अभय मौर्य अंग्रेजी तथा अन्य विदेशी भाषा विश्वविद्यालय के पहले कुलपति बने

       भारत सरकार ने अंग्रेजी तथा विदेश भाषा विश्व विश्वविद्यालय अधिनियम 2006 (2007 की संख्या-7) को अधिसूचित कर दिया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के स्लाविक अध्ययन विभाग के अध्यक्ष, प्रो0 अभय मौर्य ने 3 अगस्त, 2007 से अंग्रेजी तथा विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, हैदराबाद के पहले कुलपति के रूप में पदभार ग्रहण किर लिया है।

      हैदराबाद स्थित अंग्रेजी तथा विदेशी भाषा विश्वविद्यलाय, 24वां ऐसा केन्द्रीय विश्वविद्यालय है, जिसे संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित किया गया है। अंग्रेजी तथा विदेशी भाषा विश्व विद्यालय अधिनियम के अधिसूचित हो जाने से देश में अब अंग्रेजी तथा विदेशी भाषाओं और उनके साहित्य के विकास के प्रति समर्पित एक केन्द्रीय विश्व विद्यालय स्थापित हो गया है।

      प्रो0 अभय मौर्य, हरियाणा के एक गांव के कृषक परिवार से है। प्रो0 मौर्य 1988 से रूसी साहित्य के प्रोफेसर हैं और उन्होंने ही दिल्ली विश्वविद्यालय में स्लाविक अध्ययन विभाग की स्थापना की थी। उन्होंने न केवल 12 शोध प्रधान तथा सृजनात्मक पुस्तकें लिखी हैं, बल्कि उन्हें 50 से अधिक शोध पत्र लिखने का भी श्रेय प्राप्त है। उन्हें विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय स्तरों पर सम्मानों से नवाजा गया है। प्रो0 मौर्य यूनेस्को की विभिन्न संस्थाओं से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। उन्हें जिन सम्मानों से नवाजा गया है उनमें से एक है ए.एस.पुश्किन पदक जो रूसी साहित्य और भाषा के क्षेत्र में विशिष्ट सेवाओं के लिए प्रदान किया जाने वाला श्रेष्ठ सम्मान है। उनके द्वारा लिखित उपन्यास फाल ऑफ ए हीरो (वर्ष 2998 अंग्रेजी में) युगनायिका (हिन्दी में वर्ष 2006) और मुक्ति-पथ (वर्ष 2006 हिन्दी में) की समालोचक ने काफी सराहना की है।

      मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा आज यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है।

 

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