सौर ऊर्जा केन्द्र - नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का तकनीकी केन्द्र बिन्दु

सौर ऊर्जा केन्द्र - नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का तकनीकी केन्द्र बिन्दु

नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय सौर ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विकास और संवर्धन के लिए तकनीकी केन्द्र बिन्दु के रूप में सौर ऊर्जा केन्द्रों पर विशेष ध्यान दे रहा है । केन्द्र में पत्रकारों के एक दल से बातचीत करते हुए, डॉ0 बिबेक बंदोपाध्याय ने कहा कि 200 एकड़ में फैले इस परिसर में हमने सौर पेसिव तकनीकों पर भवनों का निर्माण किया है, ताकि ऊर्जा की बचत की जा सके और परिसर में पर्यावरण के लिए अनुकूल माहौल पैदा किया जा सके । उन्होंने कहा कि हमने सौर ऊर्जा से चलने वाले कई प्वाइंट इस परिसर में लगाए हैं जिनसे ऊर्जा की बचत होती है । ये बिन्दु सर्दियों के दौरान सौर ऊर्जा का विकिरण करते हैं और गर्मी के दौरान विकिरणन रोकते हैं ।

      केन्द्र में डिजाइन विकास, परीक्षण और मूल्यांकन के लिए उपकरण, प्रयोगशालाएं तथा अन्य सहयोगी सुविधाएं मौजूद हैं । उन्होंने बताया कि केन्द्र में परीक्षण तथा मानकीकरण की सुविधाएं भी मौजूद हैं । सौर ऊर्जा केन्द्र देश के अनुसंधान संस्थानों, शैक्षिक संस्थानों और उद्योगों को सौर प्रौद्योगिकी के विकास में सहायता प्रदान करता है । संगठनों द्वारा विकिसत उत्पादों को परीक्षण तथा मानकीकरण के लिए यहां लाया जाता है । केन्द्र इनका मूल्यांकन करता है और इनमें बेहतरी के लिए संशोधन के सुझाव देता है । इसके फलस्वरूप और ज्यादा विश्वसीनय और कुशल उत्पाद तैयार होते हैं ।

      केन्द्र में मौजूद सौर ताप परीक्षण सुविधाएं सौर ताप संग्राहकों, घरों में सौर ऊर्जा से पानी गर्म करने की प्रणालियों और सौर कुकरों के परीक्षण में सक्षम हैं । सौर ऊर्जा केन्द्र भारतीय मानक ब्यूरो के साथ निकट सहयोग से काम करता है । भारतीय मानक ब्यूरो ने अंतर्राष्ट्रीय मानको के अनुरूप सौर पऊलैट प्लेट संग्राहकों पर भारतीय मानक तैयार किए हैं ।

      सोलर फोटो-वोल्टिक सुविधाओं की जानकारी देते हुए बताया गया कि दुनियां में ऐसे केवल चार केन्द्र हैं । ये केन्द्र हैं - आईएसपीआरए, मिलान, इटली, टीयूवी, जर्मनी, अमेरिका की ऐरीजोना यूनिवर्सिटी और क्योटो । सोलर कोशिकाओं को सोलर वेफर्स और मॉडयूल या सोलर पैनल भी कहा जाता है । देश में इनकी काफी मांग है । हम लगभग 30 प्रतिशत सोलर पैनल आयात करते हैं। दूरसंचार मंत्रालय, रक्षा, रेलवे और ओएनजीसी इस प्रणाली के स्थायी ग्राहक हैं । देश में घरों में प्रकाश प्रणाली में क्रान्ति की चर्चा करते हुए डॉ0 बंधोपाध्याय ने कहा कि प्रकाश उत्सर्जित करने वाले डायोड विकसित कर लिए गए हैं । हाल ही में फ्लूरोसेंट प्रणाली में थोड़ा सा बदलाव करके सीएफएल बल्ब बाजार में उतारे गए हैं । अभी हाल तक एलईडी का इस्तेमाल  इलैक्ट्रानिक उपकरणों में  इंडीकेटर्स के रूप में किया जाता था लेकिन श्वेत एलईडी के विकास से जल्द ही हम प्रकाश की एलईडी प्रणाली का इस्तेमाल करने लगेंगे । इनकी लाईफ ज्यादा होती है और ये कठिन हालातों में भी काम कर सकते हैं जबकि फ्लूरोसेंट उपकरण ठण्डे क्षेत्रों जैसे लेह लद्दाख और काफी गर्म क्षेत्रों जैसे राजस्थान में काम नहीं करते हैं ।

      मंत्रालय के प्रयासो के फलस्वरूप देश में 5,60,000 सौर लालटेन, घरों में प्रकाश के  3,42,000 उपकरण, सड़कों पर 5,700 सोलर लाईट और लगभग 7000 वाटर पम्प हैं ।

      सौर ऊर्जा केन्द्र जैव-इंधन की दिशा में भी काम कर रहा है और 26 एकड़ जमीन पर तीन अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों से जटरोफा के 26000 पौधें लगाए गए हैं ।

 

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