''मंथन-2007'' के आजीविका समूहों के सिफारिशों के क्रियान्वयन के संबंध में समन्वित आजीविका कार्यक्रम का अनुमोदन

''मंथन-2007'' के आजीविका समूहों के सिफारिशों के क्रियान्वयन के संबंध में समन्वित आजीविका कार्यक्रम का अनुमोदन

पर्यटन विकास के लिए निजी क्षेत्र को भूमि के लिए कार्यविधि को मंजूरी, भोपाल-सीहोर बायपास परियोजना को पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रीपरिषद की बैठक में मंथन 2007 में गठित आजीविका समूहों की सिफारिशों के क्रियान्वयन के संबंध में समन्वित आजीविका कार्यक्रम का अनुमोदन किया गया।

प्रदेश में आजीविका के लिये विभिन्न विभागों द्वारा 22 से भी अधिक स्व-रोजगार की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन में समन्वय का अभाव होने तथा बाजार मूलक रणनीति न अपनाए जाने के कारण वांछित परिणाम प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं। इन योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु विकासखण्ड स्तर के नीचे अमला भी उपलब्ध नहीं है। एक ही प्रकृति की योजनाओं का क्रियान्वयन विभिन्न विभागों द्वारा किये जाने के कारण उपलब्ध संसाधनों का युक्तिपूर्ण उपयोग नहीं हो पाता है। लक्ष्य पूर्ति के समय हितग्राहियों की क्षमता एवं रुचि तथा क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों का ध्यान नहीं रखा जाता है। बिना बिजनिस प्लान तैयार किये प्रकरण बैंक ऋण हेतु अग्रेषित किये जाते हैं। हितग्राहियों द्वारा उत्पादित सामग्रियों की गुणवत्ता बाजार की मांग के अनुरूप न होने के कारण उनको बेचना संभव नहीं हो पाता है। अत: योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु समन्वित आजीविका क्रियान्वयन कार्यक्रम तैयार किया गया है।

इसके अंतर्गत ग्रामीण विकास विभाग की स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना, इंदिरा गांधी गरीबी हटाओ योजना और मध्यप्रदेश आजीविका परियोजना, उद्योग विभाग की प्रधानमंत्री रोजगार योजना, दीनदयाल रोजगार योजना और रानी दुर्गावती अनुसूचित जाति#अनुसूचित जनजाति स्वरोजगार योजना, आदिम जाति कल्याण विभाग की अस्वच्छ धंधों का व्यवसायीकरण योजना, म.प्र.विमुक्त, घुमक्कड़, अर्धघुमक्कड़ जाति विकास योजना, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति विकास निगम की योजनाएँ, अनूसूचित जनजाति विकास निगम की योजनाएँ और पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास की योजनाएँ, महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाएँ, वनविभाग की लघु वनोपज क्रय विक्रय की योजना, ग्रामोद्योग विभाग की परिवारमूलक ईकाई की योजना (खादी बोर्ड), स्वावलम्बन (रेशम संचालनालय), दीनदयाल हाथकरघा प्रोत्साहन योजना, ग्रामोद्योग प्लस योजना, पशुपालन विभाग की विनिमय के आधार पर बकरी, शुकर पालन योजना, गो सेवक, कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन विभाग की मत्स्य पालन योजना और कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की खेत तालाब योजना सम्मिलित की गई हैं।

वैकल्पिक रणनीति के अनुसार प्रदेश में आजीविका के अवसर प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्र में उनकी प्रकृति के अनुरूप क्रियान्वयन हेतु प्रस्तावित किये जायेंगे। प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत प्रदेश की जनसंख्या का दो तिहाई भाग कृषि, पशुपालन, मछलीपालन, मुर्गीपालन, डेयरी, लघु वनोपज आदि प्रमुख व्यवसाय आते हैं। इन व्यवसायों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन को प्रोत्साहित किया जायेगा। द्वितीय क्षेत्र के अंतर्गत प्रदेश में लघु उद्योग एवं वृहद उद्योगों की अनुसांगिक औद्योगिक गतिविधियों में आजीविका के अवसर बढ़ाने और उसको बढ़ावा देने की गतिविधियां संचालित की जायेंगी। तृतीयक क्षेत्र के अंतर्गत सेवा क्षेत्र में निर्मित होने वाले रोजगार के अवसरों का लाभ प्रदेश के युवाओं को मिल सके इसके लिये उनकी रोजगार पाने की क्षमता में वृध्दि की जायेगी।

समन्वित आजीविका रणनीति के क्रियान्वयन का आधार समुदाय एवं बाजार की मांग आधारित, समुदाय द्वारा स्वयं गतिविधियों का क्रियान्वयन, जन-भागीदारी, योजना क्रियान्वयन में सहयोग दल की अवधारणा और शासन की सहयोगात्मक भूमिका रहेगी।

राज्य स्तर पर आजीविका फोरम का गठन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में किया जायेगा। मंत्री पंचायत एवं ग्रामीण विकास इसके उपाध्यक्ष होंगे । संबंधित विभागों के मंत्री सदस्य होंगे। क्रियान्वयन से संबंधित नीतिगत निर्णय लेने का कार्य इस फोरम के माध्यम से किया जायेगा।

स्व-सहायता समूह संवर्धन नीति 2007

मंत्रि परिषद द्वारा स्व-सहायता समूह संवर्धन नीति 2007 को संशोधित कर प्रस्तावित किये गये प्रारूप को अनुमोदित किया गया और इसके साथ ही रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण नीति-2007 का अनुमोदन किया गया है।

प्रदेश में पर्यटन विकास

मंत्रि परिषद ने प्रदेश में पर्यटन विकास हेतु विभिन्न उद्देश्यों के लिये निजी क्षेत्र को नीलामी के माध्यम से भूमि उपलब्ध कराने की रीति, कार्यविधि आदि अनुमोदित की है। यह व्यवस्था विद्यमान एवं प्रचलित पर्यटन नीति में बतलाये गये रियायती आवंटनों के अलावा होगी। चूँकि मध्यप्रदेश देश के मध्य में स्थित प्रदेश है और नैसर्गिक सौंदर्य एवं ऐतिहासिक धरोहरों के कारण प्रदेश में पर्यटन की असीम संभवनाएं हैं। इसीलिये पर्यटन विकास एवं उसके संवर्धन तथा अनुसांगिक गतिविधियों के लिये आधारभूत संरचनाएं व सुविधाएं तैयार तथा विकसित करने हेतु भूमि प्रमुख घटक के रूप में आवश्यक होती है।

शिक्षण शुल्क से छूट

राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा लिये गए एक निर्णय के अनुसार केवल गरीबी की रेखा के नीचे के ग्रीन कार्ड धारकों के बच्चों को प्रदेश के केवल शासकीय और अनुदान प्राप्त तथा स्वशासी मेडीकल कॉलेजों, इजीनियरिंग कालेजों, पॉलिटेक्नीको और आई.टी.आई. आदि संस्थानों में शिक्षण शुल्क से छूट मिलेगी।

निजी क्षेत्र के उपरोक्त सभी महाविद्यालयों में इस तरह की छूट नहीं दी जायेगी।

मंत्रिपरिषद ने शासकीय एवं अनुदान प्राप्त,स्वशासी मेडीकल कालेजों ,इंजीनियरिंग कालेजों , पॉलीटेक्नीको और आई.टी.आई. में शिक्षण शुल्क के लाभ केवल एक बार एक डिग्री अथवा पाठयक्रम के लिये देने और मंत्रिपरिषद के पूर्व में लिये गए एक निर्णय के अनुरूप केवल शैक्षणिक शुल्क की माफ की गई राशि प्रतिपूर्ति के लिये वर्ष 2007-08 से बजट में प्रावधान के लिये मंत्रिपरिषद की उपसमिति गठित करने का निर्णय लिया है।

नगरपालिक निगम ग्वालियर लिए हुडको द्वारा स्वीकृत ऋण शासकीय प्रत्याभूति की स्वीकृति

राज्य मंत्रि परिषद ने नगरपालिक निगम ग्वालियर के लिए हुडको द्वारा स्वीकृत ऋण 26 करोड़ 42 लाख रूपये राशि प्राप्त करने के लिए शासकीय प्रत्याभूति की स्वीकृति देने का निर्णय लिया है।

रजिस्ट्रार इन्फारेमेशन के तीन पद के निर्माण की मंजूरी

मंत्रि परिषद ने उच्च न्यायालय के लिये लोवर स्केल के वेतनमान रूपये 15100-18300 के रजिस्ट्रार के तीन पदों के विरूध्द इसी वेतनमान पर रजिस्ट्रार इन्फारेमेशन के तीन पद के निर्माण की मंजूरी दी है। वेतनमान रूपये 6500-10500 वाले लेखाधिकारी एण्ड टेक्नॉलॉजी के दो पदों के विरूध्द इसी वेतनमान पर अस्सिटेंट रजिस्ट्रार कम्प्यूटराइजेशन के दो पदों की स्वीकृति दी गई है। इस प्रकार, वरिष्ठ लेखाधिकारी रूपये 10000-15200 वेतनमान के एक पद के विरूध्द वेतनमान रूपये 5500-9000 पर सीनियर कम्प्यूटर प्रोग्रामर अस्सिटेंट का एक पद और वेतनमान 4500-7500 पर जूनियर कम्प्यूटर प्रोग्रामर अस्सिटेंट का एक पद, कुल मिलाकर दो पद स्वीकृत किये गये है।

भोपाल-सीहोर बायपास मार्ग निर्माण

राज्य मंत्रि परिषद ने भोपाल-सीहोर बायपास मार्ग निर्माण की संयुक्त परियोजना के लिए 19 करोड़ 29 लाख रूपये की वृध्दि को सम्मिलित करते हुए रूपये 13437 करोड़ 13 लाख की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति जारी करने का निर्णय लिया है।

भोपाल सीहोर बायपास मार्ग परियोजना के पूर्ण होने पर भोपाल-सीहोर के शहरी क्षेत्रों के मध्य से होकर निकलने वाला भारी यातायात बिना किसी रुकावट के गंतव्य को जा सकेगा। राजधानी के चारों ओर विकसित एवं विकासशील आवासीय बस्ती, अस्पताल, औद्योगिक क्षेत्रों को सुरक्षित यातायात सुविधा मिलेगी। परियोजना के मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग-12, राष्ट्रीय राजमार्ग-86 तथा राजमार्ग-18 को राजधानी के बाहरी क्षेत्रों से होकर जोड़ता है जिससे सुगम यातायात एवं भारी वाहनों से होने वाली दुर्घटना पर रोक लगेगी। सीहोर बायपास के कारण भोपाल से इंदौर के मध्य साढ़े चार कि.मी. की दूरी कम हो जायेगी, जिससे धन एवं समय की बचत होगी। परियोजना का 81 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

खुदाई में प्राप्त नौ प्रतिमाओं को पूजा-अर्चना के लिए जैन समाज को सौंपने का निर्णय

मंत्रि परिषद ने शिवपुरी जिले की नरवर तहसील के ग्राम गोपलिया में एक निजी खेत से खुदाई में प्राप्त नौ प्रतिमाओं को पूजा-अर्चना के लिए जैन समाज को सौंपने का निर्णय लिया । लगभग दसवीं शताब्दी की ये प्रतिमाएं क्षेत्रपाल, पार्श्वनाथ जैन तीर्र्थकर (काले पत्थर पर बैठे हुए), अंबिका, आदिमनाथ, अजितनाथ, गौमेद एवं अम्बिका तथा नेमीनाथ की है।

राज्य के मण्डार क्रय नियम में संशोधन

मंत्रि परिषद ने राज्य के मण्डार क्रय नियम में संशोधन तथा उनकी समीक्षा के लिए गठित मंत्रि परिषद उपसमिति का कार्यकाल 30 अक्टूबर 2007 तक बढ़ाने का निर्णय लिया। यह उपसमिति इन नियमों के समग्र प्रस्तावित संशोधनों की समीक्षा कर प्रारूप को अंतिम रूप देगी।

वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम

मंत्रि परिषद ने अनुसूचित जनजाति एवं परम्परागत वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 (केन्द्र द्वारा अधिशासित) का प्रशासन आदिमजाति तथा अनुसूचित जाति कल्याण विभाग को सौंपे जाने के लिए म.प्र. शासन कार्य (आवंटन) नियम में यथोचित संशोधन करने का निर्णय किया।

मुरैना जिले के पोरसा में पुलिस और असामाजिक तत्वों के बीच हुई मुठभेड़

मंत्रि परिषद ने मुरैना जिले के पोरसा में पुलिस और असामाजिक तत्वों के बीच हुई मुठभेड़ की घटना की जॉच के लिए गठित आयोग के प्रतिवेदन पर कार्यवाही करने के लिए मंत्रि मंडलीय उप समिति गठित करने का निर्णय लिया।

 

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