श्रीमती रेणुका चौधरी ने बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया

श्रीमती रेणुका चौधरी ने बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया

सरकार बच्चों के विकास और संरक्षण के लिए कई कदम उठाने की योजना बना रही है। बाल अधिकार आयोग का गठन इसी दिशा में एक कदम है । 0-6 वर्ष आयु समूह के बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के लिए कानूनी फ्रेमवर्क पर राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए महिला तथा बाल विकास मंत्री श्रीमती रेणुका चौधरी ने कहा कि उनके मंत्रालय ने योजना आयोग से 11वीं योजना के दौरान समन्वित बालविकास स्कीम के तहत बच्चों के पोषक आहार के वास्ते योजना राशि में खासी वृध्दि करने का आग्रह किया है । उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण की प्रस्तावित समन्वित स्कीम के तहत बच्चों के संरक्षण और कल्याण के लिए कई संरक्षात्मक और रोकथाम संबंधी प्रावधान किए गए हैं । राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस संगोष्ठी का आयोजन किया है ।

       बच्चों के कल्याण से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों की जिला स्तर पर निगरानी की जरूरत पर बल देते हुए मंत्री महोदया ने कहा कि कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन और अपेक्षित परिणामों के लिए निगरानी अत्यंत जरूरी है । श्रीमती चौधरी ने बताया कि सरकार निजी क्षेत्र के सहयोग से बच्चों के अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए अभियान चलाएगी ।

       योजना आयोग की सदस्या डा0 सईदा हमीद ने इस अवसर पर कहा कि बच्चों का संरक्षण और कल्याण 11वीं योजना के केन्द्र में रहेगा । उन्होंने बताया कि 0-6 वर्ष की आयु समूह के बच्चों के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं । उन्होंने कहा कि टीकाकरण, स्तनपान और पोषक आहार को बच्चों का अधिकार माना जाएगा । उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार महिलाओं को 6 माह का मातृत्व अवकाश देने पर विचार करे ताकि माताएं अपने बच्चे को कम से कम 6 माह तक स्तनपान करा सकें ।

       बैठक के उद्देश्यों की चर्चा करते हुए बाल अधिकार आयोग की अध्यक्षा श्रीमती शांता सिन्हा ने कहा कि बच्चों को स्वास्थ्य, पोषक आहार, देखभाल और संरक्षण जैसी जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कानूनी प्रावधान होना चाहिए । उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र और प्रवासी श्रमिकों के बच्चों की सुरक्षा की गारंटी के लिए भी कानून होना चाहिए । उन्होंने बताया कि बैठक में 0-6 वर्ष की आयु समूह के बच्चों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर बैठक में विचार विमर्श होगा और सिफारिशें सरकार को भेजी जाएंगी ताकि इन्हें मौजूदा कानूनी ढांचे में शामिल किया जा सके । दो दिन चलने वाली इस बैठक में योजना आयोग, संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के प्रतिनिधि, चिकित्सा विशेषज्ञ, बाल विशेषज्ञ और गैर सरकारी संगठन भाग ले रहे हैं ।

 

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