मध्यप्रदेश में खनिजों के भण्डारों की खोज के कार्य में तेजी लाने के निर्देश

मध्यप्रदेश में खनिजों के भण्डारों की खोज के कार्य में तेजी लाने के निर्देश

राज्य भू-वैज्ञानिक मण्डल की 41वीं बैठक सम्पन्न

मध्यप्रदेश में पाए जाने वाले विभिन्न खनिजों के सर्वेक्षण एवं पूर्वेक्षण कार्य की समीक्षा के लिए राज्य भू-वैज्ञानिक मण्डल की 41वीं बैठक आज मंत्रालय में सचिव खनिज साधन श्री सेवाराम की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में वर्ष 2006-07 में किये गये खनिज अन्वेक्षण कार्य एवं वर्ष 2007-08 में किये जाने वाले क्षेत्रीय कार्यों पर विचार विमर्श किया गया। बैठक में खनिज सचिव श्री सेवाराम ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में होने वाले विभिन्न खनिजों की मांग बढ़ रही है। इसलिए प्रदेश में चूना पत्थर, लौह अयस्क, मैग्नीज, कोयला व अन्य खनिजों के भण्डार अधिक से अधिक खोजकर खनित किये जायें। ऐसा करने से खनिज आधारित उद्योग प्रदेश में अधिक संख्या में लग सकेंगे।

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2006-07 में प्रदेश के विभिन्न जिलों में 10425.36 वर्ग किमी. क्षेत्र में भूमि की अन्वेषण का कार्य किया गया। प्रदेश में चूना पत्थर डोलोमाइट तथा कोयले के लिए 7616 मीटर खुदाई का कार्य किया गया। देवास जिले में उच्च श्रेणी डोलोमाइट के लिए पूर्वेक्षण कार्य किया गया। पूर्वेक्षण कार्य के बाद देवास जिले में 19.44 मिलियन टन भण्डार आंकलित किये गये। केल्साइट खनिज के सर्वेक्षण का कार्य झाबुआ जिले में किया गया। झाबुआ जिले में 91349 टन केल्साइट के भण्डार होने का अनुमान लगाया गया है। प्रदेश के अनूपपुर जिले के राजनगर, गोविन्दा क्षेत्र में कोयला हेतु पूर्वेक्षण कार्य किया गया। जबलपुर, सतना, उज्जैन एवं मुरैना जिलों की खनिज तालिका बनाने का कार्य किया गया।

बैठक में बताया गया कि राज्य शासन की मंशा के अनुरूप खनिज क्षेत्र में प्रारम्भिक सर्वेक्षण हेतु प्राईवेट कम्पनियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश के टीकमगढ़, नरसिंहपुर, गुना, दतिया, शिवपुरी, ग्वालियर तथा रीवा जिलों में हीरा, आधारभूत खनिज तथा बहुमूल्य खनिजों की खोज के लिए तीस रिकोनेन्सेस परमिट नौ कम्पनियों को जारी किये गये हैं।

बैठक में बताया गया कि इण्डियन ब्यूरो ऑफ माइन्स (आई.बी.एम.) के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर खनिजों के उत्पादन में प्रदेश का हीरा, डायस्पोर, ताम्र अयस्क, पायरोफिलाइट एवं स्लेट खनिजों के उत्पादन में प्रथम स्थान, रॉकफास्फेट, कैल्साइट, क्ले एवं ऑकर खनिज के उत्पादन में द्वितीय स्थान, मैग्नीज अयस्क, फेलस्पार एवं चूना पत्थर के उत्पादन में तृतीय स्थान तथा कोयला तथा लेटेराइट उत्पादन में चतुर्थ स्थान रहा। हीरा खनिज के उत्पादन में राज्य को देश में एकाधिकार प्राप्त है। प्रदेश में खनिजों के उत्पादन से होने वाली राजस्व आय में लगातार वृध्दि हो रही है। वर्ष 2006-07 में 918.33 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। खनिज विभाग द्वारा प्रदेश में खनिजों के अवैध उत्खनन पर लगाम कसने की कार्यवाही पर खनिज विभाग के उड़नदस्तों द्वारा की गई कार्रवाई से लगभग 3 करोड़ रूपये का राजस्व दण्ड के रूप में वसूला गया।

बैठक के समापन पर संचालक भौमिकी तथा खनिकर्म श्री आर.के. शर्मा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। बैठक में भारत सरकार की विभिन्न संस्थाओं, भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग, भारतीय खान ब्यूरो, खनिज अन्वेषण निगम, सीएमपीडीआई बिलासपुर, राष्ट्रीय खनिज विकास निगम हैदराबाद, राज्य खनिज निगम, भोपाल मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, रीजनल रिसर्च लेबोरेटॅरी भोपाल आदि के सदस्यों ने भाग लिया।

 

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