ग्वालियर टाइम्स वेबसाइट के इस भाग का प्रकाशन मुरैना ब्यूरो द्वारा किया जाता है । संपर्क- संजय गुप्ता मांडिल, मांडिल कम्प्यूटर्स, सूबात रोड, मुरैना म.प्र. भारत पिन- 476001 मोबाइल- 9425126674
अमन के लिये जंग
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हम अमन चाहते हैं जुल्म के खिलाफ, फैसला गर जंग से होगा तो जंग ही सही ।- रामप्रसाद विस्मिल
संजय गुप्ता मांडिल, ब्यूरो मुरैना/ नाम निर्देशन पत्र दाखिल करने के पांचवे दिन यानी 15 अक्टूबर को 17 उम्मीदवारों द्वारा अपनी नाम जद्दगी का पर्चा दाखिल किये। जिसमें विधानसभा क्षेत्र जौरा से 3, सुमावली से 2, मुरैना से 3, दिमनी से 3 और अंबाह विधानसभा क्षेत्र से 7 उम्मीदवारों ने नाम निर्देशन पत्र भरे। विधानसभा उपनिर्वाचन 2020 कार्यक्रम के तहत अब तक नाम जद्दगी के लिये केबल एक दिन शेष बचा है। विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 04 जौरा के रिटर्निंग ऑफीसर श्री नीरज शर्मा ने बताया कि श्री राजवीर सिंह धाकड़ ने निर्दलीय, श्री अर्जुन सिंह सिकरवार ने भारतीय मजदूर जनता पार्टी और श्री सोनेराम ने बहुजन समाज पार्टी से प्रत्याशी के रूप में अपना नाम निर्देशन पत्र दाखिल किया। विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 05 सुमावली के रिटर्निंग ऑफीसर श्री सुरेश बराहदिया ने बताया कि श्री रणजीत सिंह ने निर्दलीय और श्री अजब सिंह कुशवाह ने कॉग्रंेस पार्टी से अपना नाम निर्देशन पत्र दाखिल किया। ...
संजय गुप्ता मांडिल, ब्यूरो मुरैना/ विधानसभा उपनिर्वाचन 2020 में शतप्रतिशत मतदान के लिए मतदाताओं को जागरूक करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाये जा रहे है। मतदाताओं को मतदान के लिए जागरूक करने हेतु विधानसभा क्षेत्र मुरैना के के ग्राम नौगांव, जखौदा में रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। रंगोली प्रतियोगिता के माध्यम से सभी महिलाओं ने शतप्रतिशत मतदान करने का संकल्प लिया।
व्यंग्य आलेख- सेतु उत्तर काण्ड बनाम बक बक न करिये जनाब नरेन्द्र सिंह तोमर ' आनन्द ' (यह आलेख सेतु विवादम का भाग 2 नहीं है ) मैंने जब सेतु विवादम बनाम जाकी रही भावना जैसी वाला आलेख लिखा था इतनी जल्दी उस पर एक्शन हो कर समस्या के पटाक्षेप की मुझे कतई उम्मीद नहीं थी और उसके लिये पूरी तैयारी के साथ लगभग 7 किश्ते इस आलेख की मेरे मनोमस्तिष्क में तैयार थीं किन्तु कांग्रेस नेता आदरणीया सोनिया जी और उनके सहयोगीयों ने बात या आलेख के आगे बढ़ने से पहले ही आलेख की विषयवस्तु का पटाक्षेप कर दिया, सो आगे की किश्त लेखन की आवश्यकता ही नहीं रही । किन्तु कुछ क्षेत्रीय नेताओं ने इस विषयवस्तु के पटाक्षेप उपरान्त जो चिल्लपों इस देश में मचा रखी है, कुछ बाते उन पर भी करना प्रासंगिक होगा । यूं तो हर नेता का अपना सुर होता है और अपनी अपनी ढपली अपना अपना राग हुआ करता है । लेकिन नेता जब तक सुर में बोले तो चलो ठीक है लेकिन जब बेसुरा और भौंड़ा होकर नर्राने लगता है तो बर्दाश्त की सीमायें लांघ जाता है । वे तर्क और विश्लेषण की दुहाईयों तक उतर ...
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