विद्यालयों में बालकों को शारीरिक दंड पर रोक लगाने के निर्देश

विद्यालयों में बालकों को शारीरिक दंड पर रोक लगाने के निर्देश

बाल अधिकारों की रक्षा के लिए गठित राष्ट्रीय आयोग ने राज्य सरकारों से विद्यालयों में शारीरिक दंड की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया है । आयोग की अध्यक्षा श्रीमती शांता सिन्हा ने विद्यालयों में हाल ही हिंसक घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकारोंकेन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजे एक पत्र में कहा है कि किसी भी प्रकार का शारीरिक दंड मानवाधिकारों का उल्लंघन है ।

      शारीरिक दंड पर प्रतिबंध से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दंड से बच्चों को बचाने की जिम्मेदारी का दायित्व विद्यालय के शिक्षकों, शिक्षा प्रशासन और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार लोगों का समान रूप से होता है । उन्होंने निर्देश दिया कि सभी राज्यों के शिक्षा विभागों को निम्नलिखित निर्देशों का निश्चित रूप से पालन करना चाहिए -

·        अभियानों तथा प्रचार प्रक्रियाओं के माध्यम से सभी बच्चों को सूचित करना कि शारीरिक दंड के खिलाफ बोलने तथा इसकी सूचना अधिकारियों को देने का उन्हें अधिकार है । उनको शिकायत दर्ज करने के लिए तथा दंड को विद्यालय की एक सामान्य प्रक्रिया के रूप में न स्वीकार करने का विश्वास दिलाना चाहिए ।

·        छात्रावास समेत सभी विद्यालय, जेजे आवास, आश्रय घर और अन्य सार्वजनिक स्थान जो बच्चों के लिए बने हैं, इनमें एक मंच होना चाहिए जहां बच्चे अपने विचारों को अभिव्यक्त कर सकें । ये सभी संस्थान इस काम को पूरा करने के लिए गैर सरकारी संगठन की मदद ले सकते हैं ।

·        इसके बाद प्रत्येक विद्यालय में एक शिकायत पेटी की व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें बच्चे अपनी शिकायतों को लिखकर डाल सकें चाहे ये शिकायतें गुमनाम ही क्यों न हों ।

·        शिकायतों की समीक्षा तथा उनपर कारवाई करने के लिए अभिभावक अध्यापक एसोसियेशन या एसईसीवीईसी जैसे किसी अन्य निकाय की मासिक बैठक होनी चाहिए ।

·        अभिभावक तथा अध्यापक एसोसियेशन को बच्चों द्वारा की गई किसी शिकायत पर बिना देर किये और समस्या के और गंभीर होने का इंतजार किये बिना फौरन कारवाई करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए । दूसरे शब्दों में कहें त, अभिभावक-अध्यापक एसोसिएशन को शिकायत की गंभीरता पर अपने विवेक से फैसला नहीं लेना चाहिए ।

·        अभिभावकों तथा बच्चों को बिना किसी भय के शारीरिक दंड के खिलाफ बोलने का अधिकार होना चाहिए । उनके मन में इस प्रकार का भय नहीं होना चाहिए कि शिकायत करने से विद्यालयों में बच्चों के सहयोग पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा ।

·        प्रखं, जिला तथा राज्य सभी स्तरों पर शिक्षा विभाग को ऐसी प्रक्रियाएं शुरू करनी होंगी जिनसे बच्चों की शिकायतों पर प्रतिक्रियाओं की समीक्षा तथा उन शिकायतों पर की गई कार्रवाई की निगरानी की जा सके ।

      आयोग ने राज्यों से उपरोक्त निर्देशों के संबंध में की गयी कार्रवाई के बारे में दो महीनों के अंदर सूचित करने का भी निर्देश दिया है ।

 

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