सफलता के कीर्तिमान स्थापित करता मध्यप्रदेश का किसान

Sanjay Gupta Mandil, MORENA/ यह किसानों के विश्वास और खुशहाली का मध्यप्रदेश है, जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कृतसंकल्पित होकर किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रहे हैं। कोरोना, अतिवृष्टि का संकट हो या किसानों के सामने अन्य कोई भी समस्या, मुख्यमंत्री श्री चौहान राज्य के किसी भी कोने में किसानों के बीच पहुँच जाते हैं। दरअसल मध्यप्रदेश गांवों का प्रदेश है और यहाँ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान है। मुख्यमंत्री स्वयं किसान परिवार से संबंध रखते हैं और किसानों की समस्याओं के निराकरण को लेकर वे बेहद संवेदनशील रहे हैं। यही कारण है कि मध्यप्रदेश के किसानों ने बीते कुछ वर्षों में सफलता के कीर्तिमान गढ़े हैं और अब किसान कल्याण और कृषि उत्पादन में प्रदेश का नाम देश के अग्रणी राज्यों में शुमार किया जाने लगा है।
    इस समय समूचा विश्व कोरोना की महामारी को झेल रहा है। इसका प्रभाव हमारे रोजमर्रा के जीवन पर भी पड़ा है और समाज के सभी वर्ग इससे प्रभावित हुए हैं। अर्थव्यवस्था के लिए बेहद चुनौती का समय होने के बाद भी किसानों के हितों पर कोई आँच न आए, इसका ध्यान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा बखूबी रखा जा रहा है। किसान कल्याण में नए आयाम जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने उज्जैन की पावन महाकाल की धरती से प्रदेश के 22 लाख 51 हजार 188 किसानों के खातों में एक साथ 4,686 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की है। वास्तव में किसानों के हितों की रक्षा के लिये मुख्यमंत्री सदैव संकल्पित रहे हैं और यह उनकी नीतियों में भी निरंतर प्रतिबिंबित होता है। उनकी सरकार की प्राथमिकता किसान का हित है और वे हर परिस्थिति में किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। महाकाल की धरती से उन्होंने अपनी सरकार की किसानों को लेकर भावी योजना भी जनता के सामने रखी।   
    किसानों द्वारा रबी सीजन में की गई कड़ी मेहनत को पूरे देश में सराहा गया है। इस वर्ष गेहूँ उत्पादन में प्रदेश के किसानों ने जो इतिहास रचा, उससे मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। किसानों की इस उपलब्धि के ऐवज में राज्य सरकार द्वारा किसानों को 25 हजार करोड़ रूपये की राशि का भुगतान किया गया। यही नहीं मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों से तिवड़ा लगा चना भी खरीदा। पूर्व में 13 क्विंटल चना खरीदी की अनुमति थी,जिसे बढ़ाने के लिये केन्द्रीय कृषि मंत्री से चर्चा कर चना खरीदी लिमिट को 20 क्विंटल तक बढ़ाया गया। पूर्व में मध्यप्रदेश के 35 लाख किसानों को प्रधानमंत्री सम्मान निधि का लाभ मिलता था, जिसे राज्य सरकार ने बढ़ाकर 77 लाख किसानों तक कर दिया है।
    प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से प्रदेश का किसान लाभान्वित हो, इसका बेहतर प्रबंधन शिवराज सरकार द्वारा किया गया और वर्ष 2020 में पुन: सरकार में आते ही किसानों की प्रधानमंत्री फसल बीमा की पुरानी किश्त भरने का काम किया जिसका भरपूर लाभ प्रदेश्के किसानों को मिला है। फसल बीमा की न्यूनतम राशि को लेकर सरकार नए नियम बनाने के लिये आगे बढ़ रही है और जिसका लाभ हमारे किसान परिवारों को मिलेगा।
    कोरोना काल की चुनौतियों के बीच श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश में कोई भी मंडी बन्द नहीं होगी तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी भी कभी बन्द नहीं की जायेगी। कोई भी किसान क्रेडिट कार्ड से वंचित नहीं रहेगा। दूध उत्पादक कृषकों के भी किसान क्रेडिट कार्ड बनाये जायेंगे। यदि कोई व्यक्ति गोवंश के लिये ऋण लेता है तो उसे जीरो प्रतिशत ब्याज पर ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी। स्वामित्व योजना के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्र का सर्वे कर ग्रामीण व्यक्तियों को भू-अधिकार दिया जायेगा। किसानों के हित में प्रदेश में एक हजार जलवायु आधारित गाँव बनाये जाने की योजना भी है।
    प्रदेश के किसानों को अब फूड प्रोसेसिंग से भी जोड़ा जा रहा है, जिससे उनके द्वारा उत्पादित कच्चे माल का उपयोग फूड प्रोसेसिंग में कर रोजगार भी बढ़ाये जायेंगे। जैविक खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिले की उद्यानिकी फसल को पहचान दिलाने की कोशिशें भी प्रांरभ की गई हैं। किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए सहकारी बैंक का भरोसा बेहद जरूरी है। इस दिशा में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने 1500 करोड़ रुपये भरने का एलान कर दिया है। साथ ही भावांतर के 470 करोड़ रुपये भी देने कि घोषणा की है। देश के करोड़ों किसानों के आत्मविश्वास,सम्मान,सुरक्षा और पारदर्शिता का नाम है फसल बीमा योजना। प्राकृतिक आपदाओं से फसल खराब होने का संकट हमारे देश मे लगातार बना रहता है।

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