जल, धर्म, पर्यावरण एवं नागरिक एक-दूसरे के पूरक

जल, धर्म, पर्यावरण एवं नागरिक एक-दूसरे के पूरक

जल वर्ष की परामर्श-दात्री समिति की पहली बैठक सम्पन्न

केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2007 को जल वर्ष घोषित किया गया है। इसके अन्तर्गत नर्मदा बेसिन संगठन, केन्द्रीय जल आयोग के भोपाल स्थित क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा जल सम्बन्धी जन अभियान हेतु अंतर्विभागीय परामर्शदात्री समन्वय समिति की पहली बैठक का आयोजन बाँध सुरक्षा भवन के सभाकक्ष में धर्मगुरुओं एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति में किया गया।

कार्यक्रम के आरम्भ में केन्द्रीय जल आयोग के मुख्य अभियन्ता श्री राधेश्याम गोयल ने बताया कि उचित जल की उपलब्धता में हो रही निरन्तर कमी को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार द्वारा जल सम्बन्धी नीतियों, कार्यक्रमों एवं परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन एवं जन-सामान्य को इनकी सही जानकारी प्रदान करने के लिए जल वर्ष 2007 के दौरान विभिन्न स्तरों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विभिन्न धर्मगुरुओं, संचार माध्यमों, शिक्षण संस्थानों, हितग्राहियों एवं विशेषज्ञों के सहयोग से जल विकास सम्बन्धी जानकारी को आमजन तक पहुंचाया जाएगा। जल संसाधनों का संरक्षण, विकास एवं प्रबन्धन का ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता बढ़ाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता पर है। राष्ट्रीय न्यूनतम साझा कार्यक्रम में भी सिंचाई एवं पेयजल प्रबन्धन एवं परियोजना पूर्ण करने पर बल दिया गया है। सिंचित क्षेत्र में वृध्दि को भारत निर्माण में प्रमुखता दी गई है। ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में सिंचित क्षेत्र की वृध्दि दर दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया है। केन्द्र सरकार के जल संसाधन मंत्रालय द्वारा राज्यों की जल संसाधन योजनाओं के विकास के लिए विभिन्न कार्यक्रमों द्वारा सहायता दी जा रही है। इन कार्यक्रमों में त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम, कमान क्षेत्र विकास एवं जल प्रबन्धन कार्यक्रम, सिंचाई सम्बन्धी जल निकायों का पुनर्नवीनीकरण, बाढ़ एवं क्षरणरोधी कार्य और भू-जल का कृत्रिम पुनर्भरण शामिल है।

जल वर्ष के दौरान आमजन के लिए रेडियो एवं दूरदर्शन के माध्यम से जन-चेतना अभियान चलाया जाएगा। सिंचाई हितग्राहियों हेतु गाँवों में कृषि विश्व, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं वाल्मी के माध्यम से कृषक भागीदारी कार्यक्रम के अंतर्गत पानी पंचायतों का गठन किया जाएगा। राज्यों एवं केन्द्र सरकार के कर्मचारियों, अभियन्ताओं, वास्तुविदों, खननकर्मियों एवं अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं हेतु जल प्रबन्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम को जल वर्ष 2007 के लिये प्रमुख गतिविधि के रूप में शामिल किया गया है। परामर्श-दात्री समिति की आमसभा, जल संसाधनों से सम्बन्धित तकनीकी एवं प्रबन्धकीय मुद्दों पर कार्यशाला एवं परिसंवाद तथा राष्ट्रीय जल संगोष्ठी का आयोजन जन-जागरण हेतु महत्वपूर्ण गतिविधियों के रूप में चिन्हित किये गए हैं। जल संसाधनों से सम्बन्धित उपलब्ध जानकारी तथा ज्ञान के उपयोगकर्ता स्तर पर विस्तृत एवं अधिक प्रभावी प्रचार-प्रसार हेतु रणनीतियों के विषय में पुस्तिकाएं जारी करने का भी प्रावधान किया गया है।

बैठक को नगर निगम इंदौर की महापौर श्रीमती उमा शशि शर्मा, जल संसाधन सचिव श्री जे.के तिवारी, प्रमुख अभियंता डॉ. केदार नाथ अग्रवाल, कैथलिक चर्च के प्रवक्ता फादर आनंद मुटुंगल, स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधि श्री के.जी. व्यास, श्री प्रदीप व्यास, श्री एल.एस. हरदेनिया, सुश्री संगीता सक्सेना, सुश्री मृणाल गौर ने भी संबोधित किया।

 

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