सामाजिक आर्थिक विकास में दूरदर्शन की भूमिका

माजिक आर्थिक विकास में दूरदर्शन की भूमिका

 

सबसे आकर्षक और प्रभावी जनमाध्यम होने के कारण इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता है कि लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास में टेलीवीजन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। दूरदर्शन जो कि अकेला लोक सेवा टेलीवीजन प्रसारक है, 1959 में इसकी शुरुआत से ही देश के आर्थिक - सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

वर्तमान में जब लगभग 300 टीवी चैनल देश के भीतर और बाहर से कार्यक्रमों की बरसात कर रहे हैं और सभी उपायों के द्वारा अधिक से अधिक दर्शकों को आकर्षित करने की प्रतिस्पध्र्दा में लगे हुए हैं, देश के सामाजिक-आर्थिक विकास को स्वस्थ मीडिया समर्थन प्रदान करने में दूरदर्शन की जिम्मेदारी का महत्व और भी बढ़ गया है।

वर्तमान मे दूरदर्शन के 30 चैनल और एक डी टी एच सेवा है। इन चैनलों में  शामिल हैं पांच राष्ट्रीय चैनल (डी डी - 1, डी डी न्यूज, डी डी स्पोर्ट्स, डी डी भारती, डी डी उर्दू), 11 क्षेत्रीय भाषा सेटेलाइट चैनल (डी डी बांग्ला, डी डी उड़िया, डी डी सप्तगिरि, डी डी पोढ़िगई, डी डी चंदना, डी डी मलयालम, डी डी सहयाद्रि, डी डी गुजराती, डी डी पंजाबी, डी डी काशिर, डी डी नॉर्थ-ईस्ट), 1111 क्षेत्रीय सेवा राज्य नेटवर्क (राजस्थान, उत्तार प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्ताीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्ताराखंड, मिजोरम, त्रिपुरा), एक अन्तर्राष्ट्रीय चैनल (डी डी इंडिया), डी डी राज्य सभा, डी डी ज्ञान दर्शन और एक डी टी एच सेवा (डी डी डायरेक्ट प्लस)।

इन चैनलों में से दो डी डी - 1 नेशनल और डी डी न्यूज स्थलीय और सेटेलाइट दोनों स्वरूपों में हैं। इनके अलावा, क्षेत्रीय नेटवर्क और क्षेत्रीय भाषा के सेटेलाइट चैनल हैं जिनको स्थलीय समर्थन प्राप्त है। शेष तीन चैनल जिनके नाम डी डी स्पोर्ट्स, डी डी भारती और डी डी इंडिया है, सिर्फ सेटेलाइट मोड में प्रसारित करने वाले सेटेलाइट चैनल हैं।

देश के 79.1 प्रतिशत क्षेत्र और 91.4 प्रतिशत जनसंख्या पर दूरदर्शन की वर्तमान स्थलीय पहुंच है। दूरदर्शन डायरेक्ट टू होम सेवा (डी डी डायरेक्ट प्लस) के गुलदस्ते में 36 टीवी चैनल हैं और 20 रेडियो चैनल हैं और यह नि:शुल्क प्रसारण सेवा है।

प्रोग्राम प्रोडक्शन और प्रसारण को सहयोग प्रदान करने के लिए दूरदर्शन के देश भर में 64 दूरदर्शन केंद्र#स्टूडियो, 126 अनुरक्षण केन्द्र, विविध श्रेणियों के 1399 ट्रांसमीटर और 24 क्षेत्रीय समाचार इकाइयों के अलावा दो केंद्रीय प्रोडक्शन केंद्र - एक दिल्ली में तथा दूसरा गुवाहाटी में है।

इंडियन रीडरशिप सर्वे टीवी रिपोर्ट 2006 (दूसरे राउंड) के अनुसार देश में 212.7 मिलियन टीवी घर हैं। देश के 56 प्रतिशत टीवी घरों में केबल कनेक्शन हैं। शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में संबंधित प्रतिशत क्रमश: 70 और 42 हैं। दूरदर्शन अपने डायरेक्ट टू होम सेवा 'डी डी डायरेक्ट प्लस' के माध्यम से उन टीवी घरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है जहां केबल और सेटेलाइट कनेक्शन नहीं हैं।

प्रारंभ से ही दूरदर्शन ने प्रसारण समय का बहुत बड़ा हिस्सा देश की सामाजिक - आर्थिक विकास प्रक्रियाओं को मीडिया समर्थन प्रदान करने वाले कार्यक्रमों के लिए सुरक्षित रखा है। देश के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में से कुछ हैं - कृषि कार्यक्रम, ग्रामीण विकास कार्यक्रम, महिला, बाल एवं परिवार कल्याण, वयस्क शिक्षा, युवा, नागरिकों को अपने कर्तव्यों का ज्ञान और जन जागरुकता, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, बाढ़, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान विशेष कार्यक्रम, महामारियों पर कार्यक्रम। डी डी समाचार चैनल देश के विभिन्न भागों और विविध क्षेत्रों में होने वाली घटनाओं पर समाचार तथा वर्तमान मामलों पर कार्यक्रम प्रस्तुत करता है।

इन विकास कार्यक्रमों के कुशल प्रबंधन के लिए दूरदर्शन ने दो अलग कमान बनाये हैं जिनका नाम है - डेवलपमेंट कम्यूनिकेशन डिवीजन और नैरोकास्टिंग। डेवलपमेंट कम्यूनिकेशन डिवीजन, स्वास्थ्य और स्वच्छता और अन्य विकास के के मुद्दों पर ध्यान देता है तो नैरोकास्टिंग कृषि तथा सहयोगी विषयों से निपटता है।

डेवलपमेंट कम्यूनिकेशन डिवीजन (डी सी डी)

डेवलपमेंट कम्यूनिकेशन डिवीजन की स्थापना मार्च 2001 में सरकार के विविध मंत्रालयों#विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों की संचार आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए की गयी थी। डी सी डी सरकारी मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों के लिए एकल खिड़की मार्केटिंग डिवीजन और एक प्रोडक्शन हाउस के रूप में काम करता है। यह मीडिया नियोजन, सॉफ्टवेयर प्रोडक्शन, निर्धारण और प्रभाव मूल्यांकण के सभी पहलुओं को शामिल करते हुए तत्काल हल प्रस्तुत करता है। यह प्रोडक्शन की सुविधाएं, परामर्श, उपयोगी मीडिया प्लान प्रदान करता है। यह क्षेत्रीय भाषाओं में देशभर के स्टेशनों में कार्यक्रम बनाता है और ग्राहकों को संपन्न कार्यों की सूचना तथा अन्वेषण प्रदान करता है। इसकी शुरुआत से बहुत कम समय के अंदर डी सी डी ने दूरदर्शन के अंदर इन हाउस प्रोडक्शन को पुनर्जीवित करने में सफलता प्राप्त की है। यह दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो दोनों को शामिल करते हुए द्विमीडिया अभियानों में विशेषज्ञ है और ग्राहक मंत्रालयों#विभागों के सामाजिक#जनहित अभियानों के लिए एक संतुलित मीडिया प्रदर्शन को निश्चित करता है।

डीसीडी द्वारा बनाये गये कार्यक्रमों ने लोगों में विविध सामाजिक प्रासंगिक मुद्दों पर जागरुकता पैदा करने में व्यापक योगदान किया है। वर्ष 2002 से भारत का सबसे लंबा स्वास्थ्य संचार अभियान 'कल्याणी' ऐसे कार्यक्रमों का बहुत अच्छा उदाहरण है जो लोक सेवा प्रसारक की शक्ति और क्षमता को प्रदर्शित करता है। कल्याणी कार्यक्रम ने कई बीमारियों जैसे कोलरा, डायरिया, टयूबरकुलोसिस, मलेरिया, आयोडीन की कमी, एच आई वी एड्स, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, तम्बाकू#धुम्रपान के कुप्रभाव और मां एवं शिशु की देख भाल के बारे में जनजागरुकता उत्पन्न किया है। 'कल्याणी' को विश्व दिवस 2006 पर यूनाइटेड नेशन एड्स सिविल सोसायटी अवार्ड, 2006 के सर्वोत्ताम जनसेवा कार्यक्रम के लिए ब्रॉडकास्टिंग ईंजीनियरिंग सोसायटी ऑफ इंडिया अवार्ड, 2005 में रेडियो और टीवी एडवर्टाइजिंग प्रैक्टिसनर्स अवार्ड, स्विटजरलैंड के रोज दौर (स्वर्ण) अवार्ड के लिए नामांकन और कॉमनवेल्थ ब्रॉडकॉस्टिंग अवार्ड, 2004 में गेट्स मलेरिया अवार्ड से सम्मानित किया गया। डीसीडी द्वारा विकास मुद्दों पर बनाये गये अन्य कार्यक्रमों में से कुछ हैं - 'ग्रामीण भारत' (ग्रामीण विकास पर), 'भूमि' (पर्यावरण पर), 'जनजातीय दर्पण' (जनजातीय मामलों पर), 'खेल खेल में बदलो दुनियां' (पेट्रोलियम संरक्षण पर), 'जलजीवन' (जल संरक्षण पर), 'पैसा हमारा फैसला आपका' (वित्ताीय मामलों पर), 'आत्मजा' (कन्या भ्रूण हत्या पर), 'अपराजिता' (कन्या शिशु पर), 'जागो ग्राहक जागो' (उपभोक्ता मामलों पर), भारत के एकीकृत बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण पर कार्यक्रम इत्यादि। एचआईवी एड्स जागरुकता पर डीसीडी के 'कल्याणी' तथा दूसरे कार्यक्रम जासूसी श्रृंखला के 'जासूस विजय' को जनवरी 2004 में अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया एड्स कार्यक्रमों के उद्धाटन पर संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव को भेंट किया गया और जनवरी 2005 में एचआईवी एड्स राष्ट्रीय मीडिया वार्ता में भारत के प्रधानमंत्री को भेंट किया गया।

नैरोकास्टिंग

वर्ष 2000 में दूरदर्शन द्वारा क्षेत्र विशिष्ट सूचनाओं को प्रसारित करने के लिए 12 अल्प क्षमता वाले ट्रांसमीटरों को शामिल करते हुए नैरोकास्टिंग की शुरुआत की गई थी जहां स्थानीय महत्व के कार्यक्रमों को सप्ताह में एक या दो बार प्रयोग के आधार पर प्रसारित किया जाता था। इस प्रयोग की सफलता के बाद इसी विचारधारा पर 2004 में 12 पीजीएफ केन्द्रों में कृषि मंत्रालय द्वारा पोषित कृषि कार्यक्रम शुरु किया गया था। इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के बाद देश के अन्य भागों में भी नैरोकास्टिंग में इस विचारधारा के और प्रसार की मांग उत्पन्न हो गई।

कृषि बागवानी, मवेशी विज्ञान, मत्स्य इत्यादि के विशेषज्ञों द्वारा इन कार्यक्रमों को बनाया जाता है और प्रत्येक फसल की विभिन्न प्रौद्योगिकियों, विविध स्कीमों, किसानों की सफलता की कहानियों, मौसम और बाजार की कीमतों को दिन प्रतिदिन के आधार पर शामिल करते हुए इन कार्यक्रमों में विशेष प्रकाश डाला जाता है।

नैरोकास्टिंग के अन्तर्गत कृषि कार्यक्रम के अतिरिक्त, दूरदर्शन संपूर्ण देश में अपने क्षेत्रीय केन्द्रों के माध्यम से क्षेत्रीय भाषाओं#बोलियों में लगभग दैनिक आधार पर अपना कृषि कार्यक्रम प्रसारित करता है।

कार्यक्रम मूल्यांकन

डीसीडी और नैरोकास्टिंग के कार्यक्रमों पूर मूल्यांकन#प्रभाव अध्ययन नियमित आधार पर किया जाता है ताकि कार्यक्रम के प्रभाव को सुनिश्चित तथा इसे और प्रभावी और उपयोगी बनाया जा सके। किये गये अध्ययनों से साफ पता चलता है कि ये कार्यक्रम लक्ष्य दर्शकों द्वारा नियमित रूप से न सिर्फ देखे जाते हैं बल्कि वे अपने कार्यविधियों के संबंध में इन कार्यक्रमों को बहुत लाभदायक पाते हैं और इन प्रक्रियाओं के सभी पहलुओं पर अधिक से अधिक नई सूचना की मांग करते हैं।

सारांश में दूरदर्शन अपने प्रसारण समय का बहुत बड़ा भाग विकास कार्यक्रमों के लिए सुरक्षित रखता है और दर्शकों के लिए आवश्यकता आधारित, प्रभावी और लाभदायक कार्यक्रमों को बनाने के लिए सभी प्रयास करता है। इस प्रकार दूरदर्शन, देश और लोगों के सामाजिक आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इस संबंध में यह देश के अन्दर चल रहे सभी अन्य निजी चैनलों से भिन्न है।

 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नाम निर्देशन पत्र प्राप्त करने की आज अंतिम तारीख आज 17 उम्मीदावरों ने नाम निर्देशन पत्र दाखिल किये

14 स्थान कंटेनमेंट जोन से मुक्त

कवल वन्यजीव अभयारण्य में वन भूमि का अतिक्रमण