चम्बल संभाग में बिजली गुल एवं घर में उत्‍पात दुकानदारों की हानि ‘’कलह’’ विशेषांक

चम्बल संभाग में बिजली गुल एवं घर में उत्‍पाद दुकानदारों की हानि ‘’कलह’’ विशेषांक
संजय गुप्‍ता (मांडिल) मुरैना ब्‍यरो
मुरैना 08 मार्च 2008/ मुरैना में बिजली गुल होने पर उत्‍पाद एवं व्‍यवसाय ठप्‍प पड़ा होने के साथ-साथ गृहणियां कलह का भण्‍डार लेकिन सबसे परे है, कि मध्‍यम वर्ग एवं निम्‍न वर्ग का रहने वाला आदमी जो कि अपनी पूर्ति पूरी न कर सके लेकिन इन सबका भरण पोषण करता है, बिजली जाये या न जाये शासन एवं प्रशासन को कोई महत्‍व नहीं है और ना ही किसी के बारे में सोचना समझना नहीं है, बच्‍चों की परीक्षा हो या नहीं लेकिन शासन और प्रशासन के कान में जूं तक नहीं रेंगती, लेकिन मध्‍यम वर्गीय और निम्‍न वर्गीय आदमी अपनी आमदनी को न देखते हुये तब भी बिल का भुगतान करता है, चाहे बिजली पिछली माह में तीस घंटे (यानि एक धंटे प्रति दिन) नहीं हो या इस महीने (लेकिन मैंने तीस घंटे तो कम से कम कहे है अगर आप भ्रमण करें तो डेली सर्विस हो गई है प्रतिदिन के हिसाब से चार से पांच घंटे प्रतिदनि) बिल पूरा आवेगा और भरना पड़ेगा ।
हालात कहां तक ठीक हुये है । ये आप और सरकार जानते है फिर भी जनता बिजली गुल होने पर भी बिल को भर रही है । आगे के समाचार थोड़ी देर बाद बिजली चली गयी है कि --------------------------

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