मंत्रों की समाप्ति के साथ ही मां की प्रतिमाओं का विसर्जन

मंत्रों की समाप्ति के साथ ही मां की प्रतिमाओं का विसर्जन
भक्तों ने दी दण्डौत परिक्रमा़, कई जगह हुआ विशाल भण्डारें का आयोजन
संजय गुप्‍ता (मांडिल) मुरैना ब्‍यूरो चीफ मुरैना, 8 अक्टूबर। शहर के मंदिरों, झांकियों में पूरी रात मां के हवन - पूजन का कार्यक्रम चलता रहा मां के मंत्रों से वातावरण में गूंजने से वातावरण गूंज रहा था। देर सबेर मंत्रों की समाप्ति की साथ ही मां जगदम्बा, काली, चामुन्डा, दुर्गा और आदिशक्ति जैसे नौ रुपों की भक्ति में डूबा शहर आज नवरात्रि उत्सव के साथ ही समाप्त हो गया। उसके बाद महिलाओं और श्रध्दालुओं ने मंदिर में जाकर मां की पूजा अर्चना करने की। उसके बाद मां के भक्तगण शहर में विभिन्न स्थानों पर लगी झांकियों में सजी मां भगवती के कई रुपों की प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले गए।
शहर के विभिन्न गलियों, मोहल्लों में नौ दिनों विराजमान रही मां आदिशक्ति की प्रतिमाओं की विधिवत पूजा अर्चना करने के बाद उन्हें विसर्जन के लिए ले गए। इससे पहले मां के भक्तों ने मां अष्टमी की रात को दण्डौत से परिक्रमा लगाई। भक्तों में दण्डौत लगाने के उत्साह को देखते ही बनता था ऐसा लगता था कि उनके साथ मां की शक्ति लगी हुई है। दण्डौत लगाने वाले भक्त महामाया मंदिर से लेकर बड़ोखर मंदिर और बसैया मंदिर तक गए। इसके अलावा पैदल परिक्रमा करने वालें भक्त भी बसैया माता के मंदिर तक गए। इन सबके बीच समाजसेवी संस्थाओं द्वारा शर्बत, अन्नकूट, फलों के रस का भी वितरण दर्शन करने जाने वालें भक्तों में हो रहा था। रात में दिन सा प्रतीत हो रहा था हर और आकर्षक विद्युत सज्जा थी। मां के भक्त भक्ति गीत सुनाते नाचते और गाते चले जा रहे थे। खास बात तो यह थी कि परिक्रमा लगाने में महिलाओं और बच्चों की संख्या सर्वाधिक थी। दण्डवत करते हुए भक्तों ने मां के दरबार में पहुंचकर मां से अपनी मनोकामना मांगी। रात भर चले मां जगदम्बा की अराधना के बाद सुबह महिलाओं और भक्तों ने मंदिर पर जाकर पूजा अर्चना की। जगह - जगह पर विशाल भण्डारों का आयोजन किया गया। जिसमें कन्याओं, महिलाओं, साधू - संतों, ब्राह्मणों को भी भोजन कराया गया। इस अवसर पर देखा गया था कि बहुत से परिवार वाले घरो में कन्याओं को भोजन करा रहे थे। वह गली मोहल्लों में कन्याओं को खोजते फिर रहे थे। दोपहर बाद जब पूजा - अर्चना का क्रम समाप्त हुआ, उसके बाद मोहल्लों और गलियों के नोजवानों ने सामूहिक रुप से मां जगदम्बा की प्रतिमाओं को ट्रेक्टर - ट्रॉली पर रखकर विसर्जन के लिए ले जाते हुए दिखे। इस दौरान नौजवान बैण्ड बाजों और मां की गीतों की धुनों पर नाचते और मां की जयकारे लगाकर रास्ते में अबीर - और गुलाल भी उडाते हुए भक्तों ने मां की प्रतिमाओं को चम्बल और कुवांरी में विसर्जन किया।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नाम निर्देशन पत्र प्राप्त करने की आज अंतिम तारीख आज 17 उम्मीदावरों ने नाम निर्देशन पत्र दाखिल किये

14 स्थान कंटेनमेंट जोन से मुक्त

कवल वन्यजीव अभयारण्य में वन भूमि का अतिक्रमण