डाक्टरों को कठिन क्षेत्र भत्ता

डाक्टरों को कठिन क्षेत्र भत्ता
385 स्वास्थ्य संस्थाएं चयनित, 850 डॉक्टरों को लाभ, आज आदेश जारी
दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने के मकसद से मौजूदा राज्य सरकार ने पिछले दिनों डॉक्टरों को प्रोत्साहन के बतौर कठिन क्षेत्र भत्ता देने का फैसला किया था। ऐसी 385 स्वास्थ्य संस्थाओं में काम करने वाले कोई 850 डॉक्टरों को यह फायदा मिलना अब पक्का हो गया है। आज इस सिलसिले में सरकार ने मंजूरी के आदेश जारी कर दिए।
राज्य सरकार के निर्देश पर इस भत्ते का फायदा देने के लिए कोई 35 सीमॉक (समग्र आपातकालीन प्रसूति और नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवा) संस्थाओं और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों को चुना गया था। इन जगहों पर तैनात नियमित विशेषज्ञों और संविदा पर कार्यरत स्नातकोत्तर अधिकारियों को इस भत्ते का लाभ मिलेगा। इन डॉक्टरों की तादाद 150 है। फैसले का दायरा बढ़ाते हुए यह भी तय किया गया कि अब निश्चेतना, स्त्री रोग और शिशु रोग विशेषज्ञों के साथ ही अन्य रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टरों को भी यह फायदा दिया जाएगा। इन डाक्टरों को हर महीने बतौर कठिन क्षेत्र भत्ते के 10 हजार रुपये मिलेंगे। यह भत्ता एक अप्रैल 2008 से मंजूर किया गया है।
कठिन क्षेत्र भत्ते का फायदा उन 700 डॉक्टरों को भी मिलने जा रहा है जो आदिवासी बहुल इलाकों की 330 बीमॉक (मूलभूत आपातकालीन प्रसूति एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवा) संस्थाओं और 20 ऐसी ही पिछले दो सालों से चिकित्सक विहीन संस्थाओं में तैनात होंगे। ऐसे डॉक्टरों की तादाद 700 होगी और इन्हें आठ मई 2008 से 5000 रुपये हर महीने कठिन क्षेत्र भत्ता मिलेगा। इन डॉक्टरों में नियमित और संविदा चिकित्सा अधिकारी शामिल रहेंगे।
इस फैसले पर अमल के चलते अब दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में लोगों की सेहत का जिम्मा उठाने वाले डॉक्टरों की दिक्कतें दूर हो गई हैं। पहले आलम यह था कि पद खाली पड़े थे और डॉक्टर इन इलाकों में जाने से कतराते रहे थे।

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