मध्यप्रदेश को राजीव गाँधी वन्य प्राणी संरक्षण पुरस्कार मिला

मध्यप्रदेश को राजीव गाँधी वन्य प्राणी संरक्षण पुरस्कार मिला

केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा व्यक्तिगत वर्ग के पुरस्कार की घोषणा

केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने मध्यप्रदेश को व्यक्तिगत वर्ग के अंतर्गत वर्ष 2005 के लिये ''राजीव गाँधी वन्य प्राणी संरक्षण पुरस्कार'' देने की घोषणा की है। यह जानकारी वन मंत्री कुँवर विजय शाह ने आज यहां दी। उन्होंने बताया कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत शासन द्वारा प्रतिवर्ष वन्य प्राणी संरक्षण क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिये एक शासकीय#अशासकीय व्यक्ति को 'राजीव गाँधी वन्य प्राणी संरक्षण पुरस्कार' से सम्मानित किया जाता है। यह पुरस्कार व्यक्तिगत एवं संस्थागत दो वर्गों में दिया जाता है।

वन मंत्री ने बताया कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2005 के व्यक्तिगत वर्ग के पुरस्कार के लिये मध्यप्रदेश के वन अधिकारी डॉ. एच.एस. नेगी, क्षेत्रीय संचालक, कान्हा टाईगर रिजर्व के नाम की घोषणा की गई है।

डॉ. एच.एस. नेगी भारतीय वन सेवा के 1988 बैच के अधिकारी हैं। श्री नेगी को यह पुरस्कार उनके द्वारा कान्हा बाघ आरक्ष के अंतर्गत उप संचालक, बफर जोन मण्डल एवं उप संचालक, कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के रूप में उल्लेखनीय योगदान के लिये दिया जा रहा है। डॉ. नेगी ने कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के बफर जोन वन मण्डल आरंभ किये जाने के विरोध का अत्यंत विवेकपूर्ण एवं साहसपूर्ण तरीके से समाधान किया, लक्ष्य ग्रामों को बफ़र जोन वन मण्डल के महत्व से अवगत कराया एवं उन्हें वन्य प्राणी संरक्षण में भागीदार होने के लिये प्रोत्साहित किया। इसके फलस्वरूप कान्हा टाईगर रिजर्व देश के सर्वोत्तम टायगर रिजर्व के रूप में माना गया है। आज कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में अपेक्षाकृत कम जैविक दबाव एवं यहां विद्यमान शांति का श्रेय काफी हद तक डॉ. नेगी द्वारा बफ़र जोन वन मण्डल के प्रारंभिक क्रियान्वयन को जाता है।

इसी प्रकार डॉ. नेगी द्वारा बाद में उप संचालक कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के रूप में अत्यंत कर्मठता एवं निष्ठा के साथ कार्य करते हुए इस वन्य प्राणी संरक्षित क्षेत्र में वन्य एवं वन्य प्राणियों की प्रभावकारी सुरक्षा विभिन्न रणनीतियों के अंतर्गत सुनिश्चित की गयी। इस दौरान उन्होंने फेन वन्य प्राणी अभ्यारण्य को सेटेलेटिक माइक्रो कोर एवं वन्य प्राणियों के आवागमन के लिये परिस्थितिकीय गलियारे के रूप में विकसित करने में अत्यंत सूझ-बूझ एवं सक्रियता का परिचय दिया। अपनी पद स्थापना के दौरान कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के कुशल तकनीकी प्रबंधन, जिसमें अत्यन्त संकटग्रस्त प्रजाति बारासिंघा भी शामिल है, का श्रेय भी डॉ. नेगी को जाता है।

उल्लेख्रनीय है कि डॉ. नेगी को इसके पूर्व वर्ष 2000 में विश्व प्रकृति निधि-पाटा का संरक्षण पुरस्कार तथा वर्ष 2001 में मध्यप्रदेश शासन द्वारा उत्कृष्ट सेवाओं के लिये विश्व स्वर्ण पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है।

 

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