दासमुंशी ने सिमकॉन-26 का उद्धाटन किया

दासमुंशी ने सिमकॉन-26 का उद्धाटन किया

प्रसारण विषय-वस्तु की निगरानी प्रणाली के लिए राज्यों का सहयोग मांगा

       सूचना तथा प्रसारण और संसदीय कार्य मंत्री श्री पी.आर.दासमुंशी ने आज यहां 26वें सिमकॉन सम्मेलन का उद्धाटन किया । अपन सम्बोधन में उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन से हमें देश के सूचना तथा मनोरंजन उद्योग में अतिक्रमण करने वाले मुद्दों पर एक दूसरे के विचारों को समझने का अवसर मिला है ।

       श्री दासमुंशी ने आशा जताई कि टीवी चैनलों द्वार प्रसारित कार्यक्रमों और विज्ञापनों की जिला तथा स्थानीय स्तर पर निगरानी के लिए पिछले सिमकॉन में प्रस्तावित निगरानी समिति प्रणाली के अपेक्षित परिणाम मिले होंगे । मंत्री महोदय ने जोर देकर कहा कि प्राधिकृत अधिकारियों को उन्हें सौंपे गए अधिकारों का उचित सावधानी और सजगता से उपयोग करना चाहिए । किसी भी केबल आपरेटर को यह नहीं लगना चाहिए कि बिना किसी न्यायोचित कारण के मनमाने ढंग से उसे लक्ष्य बनाया जा रहा है । इन अधिकारों का सोच-समझकर इस्तेमाल इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अधिनियम में दो साल तक की सजा का कठोर प्रावधान है और यदि दोबारा इसी तरह का उल्लंघन किया जाता है तो सजा की अवधि पांच साल तक बढार्ऌ जा सकती है ।

       मंत्री महोदय ने कहा कि स्वतंत्र और मुक्त मीडिया हमारे लोकतंत्र का एक आधारस्तंभ है । सरकार इलैक्ट्रॉनिक चैनलों या किसी समाचार पत्र के कार्यक्रमों या समाचारों अथवा सम्पादकीय डैस्क में किसी भी प्रकार के दखल के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोच रही है । हालांकि, अंतिम विकल्प आम आदमी को जरुर सौंपा गया है । लेकिन लोकतांत्रिक प्रशासन को यह अवश्य सुनिश्चित करना चाहिए कि आम लोगों को एक समान अवसरों में मीडिया के बीच साफ-सुधरी प्रतिस्पर्धा के जरिए व्यापक विकल्प उपलब्ध हों । इसी संदर्भ को ध्यान में रखते हुए, परस्पर मीडिया स्वामित्व पर प्रतिबंध के मुद्दे से निपटा जाना चाहिए । यहां तक कि, प्रसारण से संबंधित विधेयक का मसौदा तैयार करने के हमारे साधारण से प्रयास से काफी शोर-शराबा हुआ और यह संदेश दिया गया कि मानो मीडिया की आजादी और अधिकारो का हनन किया जा रहा है । 

       श्री दासमुंशी ने कहा कि सरकार किसी भी चैनल के कार्यक्रम पर शर्तों को थोपना नही चाहती बल्कि वह ऐसी व्यवस्था का विकास करने का प्रयास कर रही है जिसमें कार्यक्रम संहिता और विज्ञापन संहिता की सच्ची भावना के अंतर्गत दायित्वों और जिम्मेदारियों का पालन हो । एक खुले समाज का यह मतलब नहीं है कि जैसा आप चाहें वैसा करें और लोगो के पास कोई विकल्प न हो । सरकार को समाज के हितों, महिलाओं की प्रतिष्ठा, बच्चों के हितों और हमारे साम्प्रदायिक सद्भाव के प्रति समान रूप से संवेदी होना होता है और उसका यह प्रयास होता है कि वह एक व्यवस्था के जरिए राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को न्यायोचित ठहरा सके । मंत्री महोदय ने कहा कि उनका प्रयास एक ऐसी पारदर्शी विनियामक प्रणाली बनाने का रहा है जो आम लोगों तथा हितधारकों को स्वीकार्य हो ।

       श्री दासमुंशी ने कहा कि निजी एफएम चैनलो पर समाचारों और सम-सामयिक घटनाक्रमों के प्रसारण की काफी मांग उठ रही है । हम भी इसके खिलाफ नहीं हैं लेकिन सरकार ने इसकी अनुमति इसलिए नहीं दी क्योंकि एफएम चैनलों की निगरानी के लिए कोई कारगर तथा सुस्थापित प्रणाली नहीं है ।

       उन्होंने कहा कि, सामुदायिक रेडियो नीति का उदारीकरण संप्रग सरकार की एक उपलब्धि है । सरकार को अब तक 95 आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं और 5 संगठनों को अनुमति दी जा चुकी है । मंत्री महोदय ने नई नीति का व्यापक प्रचार करने और देश के विभिन्न हिस्सों में इस स्कीम को लोकप्रिय बनाने में राज्य सरकारों का सहयोग मांगा । कैस के संबंध में, श्री दासमुंशी ने कहा कि अभी तक प्राप्त फीडबैक से ऐसे संकेत मिलते हैं कि यह प्रयोग आंशिक तौर पर सफल रहा है और देश के अन्य हिस्सों में इसक विस्तार के बारे में फैसला लेने से पहले ट्राई से इसका व्यापक मूल्यांकन करने का आग्रह किया गया है ।

       मंत्री महोदय ने कहा कि नए रंगमंचों की स्थापना को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न प्राधिकरणों से लाइसेंस प्राप्त करने और मंजूरी की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाया जाना चाहिए । लेकिन अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग प्रदर्शनी कानून हैं और ये कानून बदलते माहौल और प्रौद्योगिकी के साथ तालमेल नहीं रख पाए हैं । फिल्म प्रदर्शन और रंगमंच में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढावा देने के लिए इनमें संशोधन की जरुरत होगी ।

       पायरेसी को हतोत्साहित करने के लिए, श्री दासमुंशी ने राज्य सरकारों से विशेष प्रकोष्ठों और प्रभागों के निर्माण की संभावना तलाशने का आग्रह किया । उन्होंने राज्य सरकारों से भारत को फिल्मों की शूटिंग के लिए एक आकर्षक स्थल के रूप में बढावा देने के लिए एकल खिड़की मंजूरी प्रणाली सुलभ कराने का अनुरोध किया । मंत्री महोदय ने जोर देकर कहा कि केन्द्र तथा राज्यों की स्कीमों के बारे में लोगों को अद्यतन जानकारी देना प्रत्येक राज्य सरकार का दायित्व है ।

       श्री दासमुंशी ने राज्यों से राजधानी, शहरो और गांवों में 2 अक्टूबर, 2007 को विशेष कार्यक्रमों के आयोजन का आग्रह किया । उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों में महात्मा गांधी के आदर्शों के बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्ताव पर प्रकाश डाला जाना चाहिए ।

       मंत्री महोदय ने कहा कि सम्मेलन में बड़ी संख्या में सूचना मंत्रियों की उपस्थिति से यह स्पष्ट है कि हम सभी पायरेसी की बुराई, कैस के कार्यान्वयन, प्रसारण मीडिया के विनियमन, इस क्षेत्र के स्वस्थ विकास को बढावा देने के लिए अनुकूल माहौल के निर्माण तथा इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक फ्रेमवर्क बनाने के वास्ते कानूनो की रूपरेखा तैयार करने तथा अन्य मुद्दो से निबटन के बारे में कारगर और सृजनशील कदम उठाने के इच्छुक हैं ।

 

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