दाऊजी के दर्शनों को उमड़े श्रध्दालु

दाऊजी के दर्शनों को उमड़े श्रध्दालु
साढ़े तीन दिनों तक रहते है मुरैना गांव में भगवान, देश भर में रहते है पट बंद
मुरैना, अक्टूबर। मुरैना गांव में स्थिल दाऊजी मंदिर पर भगवान श्रीकृष्ण द्वारिकापुरी से आगमन हो गया हैं। और वह यहां मंदिर पर साढ़े तीन दिन तक रहेगें। ऐसी यहा मान्यता हैं। कि वे कार्तिक सुदी प्रतिपदा को यहां पर आते है और चतुर्थी को इनका प्रस्थान हो वापस द्वारिकापुरी के लिए हो जाता हैं। प्रात: दाऊजी मंदिर भगवान की पूजा अर्चना के साथ ही लीला मेला शुरु हो गया। मेले में आज ग्रामीण क्षेत्रों से सैकड़ों लोग भगवान के दर्शन करने को आए। इन लोगों ने दाऊ जी महाराज का प्रसाद चढ़ाकर अपने परिवार की कुशलता की कामना की। मेले में लगने वाली दुकानों पर ग्रामीण अंचलों से आए लोगों ने ही खरीददारी की। यहां पर खेल - खिलौने तथा सौंदर्य प्रशाधन की दुकानें सजी हुई हैं। महिलाओं की भीड़ खासकर इन सौंदर्य प्रशाधन वाली दुकानों पर ही अधिक दिखाई दे रही थी। इसके अलावा बच्चें खिलौनों के लिए जिद करते हुए देखे गए। मेले के एक छोर पर मंनोरंजन के लिए हवाई झूलों के साथ खेल - तमाशे बाले भी आए हुए हैं। मेलें आए हुए युवक - युवतियां झूलों और चाट पकोड़े के ठेलों पर नजर आ रही थी। वही सोफ्टी की स्टॉल पर भी लड़किया और बच्चों की भीड़ दिखाई दे रही थी। लीला मेले में मुख्य रुप से घुड़ दोड़, कुश्तिया और लाठीयों का भी प्रदर्शन होता है। जिसमें दूर - दूर से प्रतियोगी भाग लेने के लिए आते हैं। वहीं मुरैना से सुबह से ही लोगों ने नहाधोकर दाऊजी के दर्शनों के लिए निकल पड़े। सुबह से ही महादेव नाके, स्टेशन रोड से जो टैम्पों बैरियर चौराहे पर जाते थै वही आज मुरैना गांव के दाऊजी मंदिर पर जाते हुए दिखे। टैम्पों में अत्यधिक भीड़ दिखाई देने के कारण बहुत सी महिलाए और लड़किया मुरैना गांव तक पैदल ही दर्शन करते हुए गई। आज लख्खी मेला होने के नाते यहा मध्यप्रदेश के साथ - साथ उत्तरप्रदेश और राजस्थान के लोग भी यहा दाऊजी महाराज के दर्शनों के लिए भारी संख्या में आयेंगे। यहां पर प्रतिबर्ष अनेक समाजों के लोग अपने विवाह योग्य पुत्र - पुत्रियों के संबंध भी तय करते है। ऐसा माना जाता हैं कि जब दाऊजी महाराज साढ़े तीन दिन के मुरैना गांव के प्रवास पर आते है तो मथुरा, द्वारिकाधीश, बद्रीनाथ, जगन्नाथपुरी सहित देश के सभी मंदिरों के पट बंद रहते हैं। पूजा अर्चना नहीं होती हैं। दाऊजी का महत्व इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि भगवान श्रीकृष्ण अपने ग्वाल वालों के साथ गैया चराने मुरैना तक आते थे, उनके यहां से मुड़कर जाने पर बुजुर्ग लोग आज भी इसे पेच (मुड़ना) कहते थे। मुरैना गांव के स्वामी परिवारों में ऐसा माना जाता है कि लीला के समय पर किसी परिवार में महिला के बच्चा या गाय के बच्चा अवश्य होता है। दाऊजी मंदिर के पास स्थित तालाब में कालिया सांप के दर्शन भी होते हैं। मुरैना के सबसे आस्थावान प्रतिष्ठित मंदिर में हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने पहुचते है।

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